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नीतिगत पहलें

  • कृषि अनुसंधान के लिए आवंटन में वृद्वि


सरकार ने कृषि अनुसंधान को सर्वाधिक प्राथमिकता दी है । कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के योजना आवंटन को पिछले वर्ष 775 करोड रुपए से बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष 2004-05 के लिए 1000 करोड रुपए कर  दिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों ने फसलों की लगभग 50 उन्नत किस्मों/संकरों का विकास किया  है। जानवरों में बीमारियों अर्थात रिन्डर पेस्ट. इनप्लूएन्जा, आई वी डी और पी ए आर वी ओ  वायरस के नियंत्रण के लिए  नए टीके तैयार किए गए। खुर और मुँह की बीमारियों (एफ एम डी) , रक्तस्राव पूतिर्जीवरक्तता और  शीप पोम्स के टीकों में सुधार लाया गया।

  • सूक्ष्म जीव सम्बन्धी अनुसंधान कार्यक्रम

    सूक्ष्म जीवों के सम्बन्ध में अनुसंधान कार्यक्रम 200 करोड रूपये की लागत से जल्दी ही आरंभ  होगा। इसमें वांछित विशेषक, मृदा संर्वधन, कार्बनिक अपशिष्टों का जैव रुपान्तर फसल कटाई पश्चात की फर्मास्टिकल  प्रकिया आदि सहित जातियों तथा  प्रजातियों के विकास में काफी सहायता मिलेगी।
  • प्रत्येक जिले में एक कृषि विज्ञान केन्द्र

    सरकार ने देश के 578 ग्राम जिलों में से प्रत्येक में कम से कम एक कृषि विज्ञान केन्द्र खोलने का निर्णय किया है। इस समय देश में  426 केन्द्र हैं और शेष ग्राम्य जिलों में भी इस योजना के दौरान केन्द्र खोले जाएँगें।
  • राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्रहालय  की स्थापना

    राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्रहालय स्थापना उपमहाद्वीप में कृषि का विकास, हरित क्रान्ति और कृषि की विभिन्न शाखाओं में आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को विकसित करने के लिए की गई है।

 

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इसके विषयवस्तु का स्वामित्व एवं उत्तरदाई  कृषि मंत्रालय, भारत सरकार है।